स्वामी विवेकानंद जी के 3 प्रेरक प्रसंग Swami Vivekananda prerak prasang in hindi

Swami Vivekananda prerak prasang in hindi

स्वामी विवेकानंद जी के 3 प्रेरक प्रसंग

(1)केवल लक्ष्य पर ध्यान लगाओ

एक बार जब अमेरिका में एक  स्थान पर घूमने के  दौरान स्वामी विवेकानंद जी को कुछ लड़के दिखे , जो पुल पर से बन्दुक से नदी में तैर रहे अंडो के छिलकों पर निशाना लगा रहे थे , किन्तु कोई भी निशाना सही नही लगा । तब स्वामी विवेकानंद जी ने एक लड़के से बन्दुक ली और एक के बाद एक 12 निशाने लगाये, जो  सही लगे। लड़को ने स्वामी विवेकानंद जी से पूछा भला आप ऐसा कैसे कर लेते हो ?

तब स्वामी विवेकानंद जी ने जवाब दिया कि असम्भव कुछ भी  नही है । तुम जो भी कर रहे हो , पूरा दिमाग उसी एक काम में लगाओ । यदि तुम निशाना लगा रहे हो , तो पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर होना चाहिए । यदि पढ़ रहे है , तो पूरा ध्यान पढ़ाई पर ही होना चाहिए।

 

(2)सत्य का साथ कभी न छोड़े

स्वामी विवेकानंद जी  प्रारम्भ से ही मेधावी छात्र थे । सभी उनके व्यक्तित्व और वाणी से प्रभावित रहते थे। सभी सहपाठी उनकी बातों को ध्यान से सुनते थे। एक दिन कक्षा में वे कुछ मित्रो को कहानी सुना रहे थे, तभी कक्षा में शिक्षक आ गए। उन्होंने पढाना शुरू कर दिया। शिक्षक को कक्षा में कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी। उन्होंने तेज आवाज में पूछा, कौन बात कर रहा है ?

सभी छात्रों ने स्वामी विवेकानंद और उनके साथियों की ओर इशारा कर दिया। शिक्षक ने सबसे पहले स्वामी विवेकानंद से कुछ प्रश्न किए जिनका उत्तर उन्होंने सही-सही दे दिया।

शिक्षक को लगा कि यह तो ध्यान से पढ़ रहा है। इसलिए उनको बिठा दिया और शेष छात्रों को बैंच पर खड़ा होने की सजा दी। स्वामी विवेकानंद भी खड़े हो गए ।

शिक्षक बोले , ‘ तुम बैठ जाओ।’

स्वामी विवेकानंद ने आग्रह किया कि सर मुझे भी खड़ा होना होगा , क्योंकि मै ही इनसे बाते कर रहा था।

इससे शिक्षक सहित सभी छात्र उनकी सच बोलने की हिम्मत देख कर बहुत प्रभावित हुए।

 

(3)डर कर भागो मत, उसका सामना करो।

एक बार स्वामी विवेकानंद बनारस के माँ दुर्गा के मंदिर से बाहर निकल रहे थे, तभी वहाँ मौजूद बंदरो ने उन्हें घेर लिया । वे पास में आकर उनसे प्रसाद छिनने और डराने लगे। स्वामी विवेकानंद डर कर भागने लगे। बन्दर भी उनके पीछे भागने लगे।

तब वहां उपस्थित एक बूढ़े सन्यासी ने कहा ,” डरो मत , सामना करो और देखो क्या होता है।”

बूढ़े सन्यासी की बात सुन कर वे तुरंत पलटे और बंदरो की तरफ बढ़ने लगे। उनको यह देख कर बहुत आश्चर्य हुआ की सारे बन्दर भाग गए।

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